दीवाना सारा शहर निकला
मुश्किल से आंखों को एक तस्वीर पसन्द आई थी
गौर से देखा हमने तो दीवाना सारा शहर निकला
उनसे किया था सौदा हमने तो फकत इस दिल का
दीवाना मेरी हसरत का तो, ये सारा शहर निकला
अमृत पाने की चाहत में, हम तो निकले थे घर से
जिसे प्यार से देखा था, उम्मीद से इतर निकला
किसी तरह से ये घूंट इश्क का पी लिया हम ने
मिजाज इस का बहुत खूबसूरत, जहर सा निकला
अब क्या बताएं हम ये दास्तां, अपने ही इश्क की
ढूंढ़ते रहे खुशी जिस पल में वो नरक सा निकला
ऐसे में इश्क करना, अब मुनासिब कहां है यादव
जिस को टूट कर चाहा हमने वही बावफा निकला
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







