पत्थर डालने से जल की सतह लहरा गई।
मंत्र सा हवा में गूँजा तुम्हारी सुध आ गई।।
उँगलियों में कंपन अब तक रुका ही नही।
साँझ हल्दी की तरह आसमान पर छा गई।।
प्रेम की आवाज़ पेड़ पत्तियों से उलझकर।
करीब में आते-आते किस तरह शरमा गई।।
प्रीत पल्लू में कुलबुलाती आजाद होने को।
मन में ध्वनि आई अधर पर मुस्की छा गई।।
फूल सा वह काँपता क्षण न रुका 'उपदेश'।
रुंधे गीतों से किस तरह बादल छितरा गई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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