घर से निकलो तो सफ़र कीजिए हुशियारी से
ठग न ले कोई तुम्हें राह में मक्कारी से
महफ़िल-ए-हुस्न में तुम सोच समझकर आना
बच नहीं पाओगे जुल्फ़ों की गिरफ़्तारी से
डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
घर से निकलो तो सफ़र कीजिए हुशियारी से
ठग न ले कोई तुम्हें राह में मक्कारी से
महफ़िल-ए-हुस्न में तुम सोच समझकर आना
बच नहीं पाओगे जुल्फ़ों की गिरफ़्तारी से
डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद
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