दीपक की लौ
शिवानी जैन एडवोकेटByss
मिट्टी का एक छोटा सा वह नन्हा सा खिलौना,
अंधेरे कमरे में ढूंढता है अपना एक कोना।
तेल जलता है उसका, और रुई भी राख होती,
पर उसकी लौ कभी भी प्रकाश से जुदा नहीं होती।
वह सूरज नहीं है, पर सूरज का ही अंश है,
अंधेरे से लड़ने वाला वह साहसी वंश है।
हवाएं आती हैं उसे बुझाने की साज़िशें लेकर,
पर वह लड़ता है आखिरी सांस की बंदिशें लेकर।
वह नहीं कहता कि मैं रात का राजा हूँ,
वह बस कहता है कि मैं ज्योति का दरवाजा हूँ।
उसकी रोशनी में कोई पढ़ता है, कोई बढ़ता है,
दीपक बिना शोर किए अपनी ड्यूटी करता है।
त्याग की पराकाष्ठा ही सफलता की सीढ़ी है,
यही संदेश देती हमें यह दीपक की पीढ़ी है।
जो खुद को गलाकर जग को रोशन कर जाता है,
वही इतिहास के पन्नों में "सफल" कहलाता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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