ज़माने से मुख्तलिफ होने का ख्वाब रहा।
हसरतो में उलझकर नही कोई जबाव रहा।।
एक तकसीर के बदले तोहमते पाई बहुत।
उल्फत में प़ड कर नही कोई हिसाब रहा।।
किस-किस को बताऊँ सदाकत दिल की।
हर एक चेहरे में यहाँ पर बहुत फरेब रहा।।
रूहानी मोहब्बत को समझता नही कोई।
ज़माने में हर तरफ जिस्मानी दबाव रहा।।
खुदगरज बहुत देखे हर तरफ ज़माने में।
बगावत करने वालों का कोई तो सबब रहा।।
छोड़ दिया फ़िक्र करना आँसू का बहाना।
लोगों में 'उपदेश' नदामत का अभाव रहा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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