ठिठुरता हे कोई सर्द विरानों में ,
किसी के हिस्से रोशनी भरपूर आती हे
तपती रहती हे रेत रेगिस्तानों में
और गंगा हिमालय से निकल जाती हे
साक्षी लोधी

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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ठिठुरता हे कोई सर्द विरानों में ,
किसी के हिस्से रोशनी भरपूर आती हे
तपती रहती हे रेत रेगिस्तानों में
और गंगा हिमालय से निकल जाती हे
साक्षी लोधी
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