मन की हमारे गहरी परतों को खोलता है
तेरी नजर का जादू सर चढ़ के बोलता है
बहारें आयीं तो बागों में फूल खिलते लगे
कलियों पर मनचंला सा भवरां डोलता है
कहने को कुछ नहीं लिखने को कुछ नहीं
महफिल कोई कब ऐसे किताब खोलता है
कमजोर है बड़ा वह अब सुन लेगा गालियां
पर हर कदम पे उसका तो खून खौलता है
यह अपनी अपनी किस्मत सब एक से नहीं
लेकिन सभी को आदमी चांदी से तोलता है
हमको तुम्हारी चाह का पैगाम मिल चुका है
अब दास अपनी मंजिल आहों में घोलता है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







