फूले कदंब
टहनी-टहनी में कंदुक सम झूले कदंब
फूले कदंब।
सावन बीता
बादल का कोप नहीं रीता
जाने कब से तू बरस रहा
ललचाई आँखों से नाहक
जाने कब से तू तरस रहा
मन कहता है,छू ले कदंब
फूले कदंब
फूले कदंब।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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फूले कदंब
टहनी-टहनी में कंदुक सम झूले कदंब
फूले कदंब।
सावन बीता
बादल का कोप नहीं रीता
जाने कब से तू बरस रहा
ललचाई आँखों से नाहक
जाने कब से तू तरस रहा
मन कहता है,छू ले कदंब
फूले कदंब
फूले कदंब।
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