तेरी याद
कोई स्मृति भर नहीं,
वह एक धीमी-सी रोशनी है
जो मेरे भीतर
बिना लौ के जलती रहती है।
मैं अक्सर
अपने ही सन्नाटों में
तुझे सुनने की कोशिश करता हूँ—
जैसे हवा में छुपा
कोई अधूरा संगीत।
प्यार
शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता उसे,
वह तो बहता है
नदी की तरह—
कभी शांत,
कभी बेकाबू,
पर हमेशा
अपने किनारों को तलाशता हुआ।
तेरा अपनापन
किसी स्पर्श से भी गहरा है,
वह यूँ उतरता है मुझमें
जैसे प्रार्थना उतरती है
थके हुए मन में,
और फिर
हर पीड़ा को
धीरे-धीरे अर्थ देने लगती है।
जब तुम साथ थी
समय चलना भूल-सा गया था,
और अब—
हर क्षण
जैसे एक प्रश्न बनकर
मेरे सामने खड़ा है।
विरह
ये सिर्फ दूरी नहीं,
ये एक ऐसी खामोशी है
जिसमें तुम्हारा नाम
बार-बार गूंजता है,
और मैं
हर बार उसे पकड़ने की कोशिश में
और खाली हो जाता हूँ।
रातें लंबी हो गई हैं,
नींद अब
सिर्फ एक याद है,
और सपने—
वह भी शायद
तुम्हारे साथ ही चले गए।
मैंने चाँद से पूछा है
तुम्हारा हाल,
तारों में ढूँढा है
तुम्हारा चेहरा,
पर हर बार
मुझे बस
अपनी ही तन्हाई का
और गहरा आकाश मिला।
कभी लगता है
तुम भी कहीं
इसी विरह को जी रही होगी
कभी लगता है
मैं ही बस
इस कहानी का अकेला पात्र हूँ।
फिर भी—
मेरी हर धड़कन पर
तुम्हारा ही नाम है,
जैसे किसी प्राचीन शिलालेख पर
अमिट अक्षर।
मिलना
अगर नियति में हुआ,
तो हम फिर मिलेंगे—
किसी मोड़ पर,
किसी और समय में,
किसी और रूप में।
और अगर नहीं…
तो ये अधूरापन ही
मेरी संपूर्णता बन जाएगा,
क्योंकि
तुम्हें चाहना
मेरे होने का
सबसे सच्चा प्रमाण है।
जब आख़िरी साँस लूँगा,
शायद कोई नाम
मेरे होंठों पर होगा—
और वह तुम ,
क्योंकि तुम
सिर्फ मेरे प्यार में नहीं,
मेरी रूह में बसती हो।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







