पल - पल ये विचार मेरे मन में
उतर - उतर जम रहे थे,
ऐ मेरे मन के मीत,
कैसे जिऊंगी तुम्हारे बिन मैं?
बहुत ही बुरी तरह घायल
करती थी ये तन्हाई मुझे,
लौटा दो मुझे मेरे जीवन का गीत
यही याचना करती थी कृष्णा से मैं।
तुम चले गए थे दिल को यकीं नहीं था,
कहीं तो कुछ था जो बहुत बिगड़ रहा था।
तुम थे नहीं पर थे मेरे पास हरदम,
ये एहसास मुझे होता रहता था।
तुम देख रहे थे मुझे कहीं से,
उभार रहे थे मुझे खुद ही के ग़म से।
विरह अग्नि में कैसे जल रही थी मैं,
देख नहीं पाए मेरे हमनशीं इस हाल में मुझे ।
ना तुमसे देखा गया प्रेम का दर्द मेरा,
ना देखा गया उनसे
जिन्होंने दुनियां को प्रेम सिखाया।
डाल दिया तुम्हें फिर से मेरी झोली में,
लौटा दिया मेरा प्रेम मुझे एक प्रेमिका के प्रेमी ने।
💐 रीना कुमारी प्रजापत 💐
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







