गीली मिट्टी का उबटन लगा
किसान भाई खेत-खलिहान में,
धूल-मिट्टी से सजते हैं।
तब जाकर हमारे घरों में,
तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन
और पकवान पकते हैं।
उनके मेहनत के बदौलत,
चूल्हे जलते हैं और हंसते हैं।
उनके एहसानों को हम लफ़्ज़ों में,
कैसे ढाल सकते हैं।
चिड़ियों से भी कच्ची नींद में,
किसान भाई सोते हैं।
नींदों में भी हरी-भरी प्रकृति,
पेड़-पौधे बाग-बगीचे खेत-खलिहान के
सुंदर-सुंदर दृश्यों के सपने संजोते हैं।
अलार्म की जरूरत नहीं,
कर्म को ही पूजा मान
सूर्योदय से पहले,
बिस्तर छोड़ उठ जाते हैं।
नित्य वक्त पर निकलने वाले
सूर्य भगवान जी भी,
कभी-कभी छुप जाते हैं।
पर किसान भाई हमारे
आतप,ठंड,बरसात
हर रोज खेती के लिए,
वक्त पर निकल जाते हैं।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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