जन्मजात दर्दी हूँ,गहरे ज़ख्म हैं पऱ कुछ कर नहीं सकती
मुन्तज़िर हूँ तेरी मुहब्बत में, चाहकर भी मर नहीं सकती
ख़त्म कर लूँ जिंदगी क़ो पऱ क्या ये मसले हल हों जायँगे
तुम्हीं बता दो कोई हल, इनमे डूबकर तो तर नहीं सकती
तुम्हारी गोद में सर रखकर विराम लेना हैं पऱ मग़र क्यूँ
ज़ात के फैले जाल में ये चाहकर भी मैं कर नहीं सकती
एक ग़म ये कि किसी की शिद्दत की मुहब्बत नहीं रहे
अब उम्र ये हैं कि मैं किसी के इश्क़ में मर नहीं सकती
लोग कह रहे हैं अब,ये हालत मौत का इशारा हैं प्यारी
अभी हालत और बिगड़नी हैं मौत यूँ उतर नहीं सकती
बड़ी मुश्किल सी राहें हैं,ये बड़ी बेज़ान निगाहे हैं कृष्णा
हर तरफ अँधेरे हैं इनसे डरकर भी मैं यूँ डर नहीं सकती...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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