"मुस्कुराता बचपन"
धूल भरी पगडंडी पर नंगे पाँव दौड़ता,
माँ की डाँट में भी लड्डू-सा लगता बचपन।
कागज़ की नाव में सारा सावन बहता,
छप-छप करती पोखर में खिलता बचपन।
ना कल की चिंता, ना कोई हिसाब-किताब,
टॉफी के बदले बाँट देता सारा जहान।
इमली की खट्टी यादों से भरा गुल्लक,
दादी की कहानी में सो जाता बचपन।
होमवर्क से भागे, पर तितली के पीछे भागे,
चाँद को मामा कहकर रोज़ बुलाता बचपन।
मिट्टी के घरौंदे में बसती थी दुनिया सारी,
हर आँख में सूरज-सा जगमगाता बचपन।
आम के बगीचे में गिलहरी-सी फुदकन,
कंचों की खनक में छुपा खजाना बचपन।
बारिश की बूँदों से करता था यारी,
किलकारी में गूंजे सारा आँगन बचपन।
स्लेट पर खड़िया से सपने सजाता,
नींद में भी परियों से बातें करता बचपन।
रूठे तो मन जाए गुड़ की डली से,
लौटा दो कोई वो दिन, वो भोली हँसी,
जहाँ आँसू भी मोती-सा मुस्कुराता बचपन।
रचनाकार-पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)✍️✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







