भोर के गीत सुहानी लगती है
उनको जिन्हें प्रकृति पर विश्वास हो
यौवनांगी लताएं सुंदर लगती है
उनको जिन्हें मिट्टी पर वास्ता हो
हवा की झोंक दिल को भाती है
उनको जिन्हें पत्तों के नाच देखकर
कोयल की कूक दिल को लुभाती है
उनको जिनमें सुबह के पहले से इंतजार हो
चाँद की रोशनी मनमोहनी लगती है
उनको जिन्हें सुबह से पहले उठते है ॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







