जिनका नहीं कोई भी, उनके लिए अपने बनना,
निराश आँखों के लिए, उम्मीदों के सपने बनना।
पढ़ कर जिसे, आ जाए सबके चेहरे पे मुस्कान,
गीत और ग़ज़लों की वो किताब के पन्ने बनना।
जल रही है मन में जो ईर्ष्या और द्वेष की आग,
मिटा सके इनको, तुम प्रेम के वो झरने बनना।
खुद के लिए सब जीते औरों के लिए जीए कौन,
मिले जो मौका तो दूसरों की तुम धड़कने बनना।
वो बच्चियाँ जो खेलती थी मिट्टियों, पत्थरों से,
बन सको तो ये दोस्त उनके लिए गहने बनना।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







