नश्वर शरीर में कण - कण खिल उठा
तेरे नाम जपते ही तन - मन झूम उठे है
खुशी के दामन में घर - घर मंदिर बने
तेरी शरण में आते ही सुध - बुध आ बैठे है
तेरी छवि की यादों में पल - पल गुजरने लगे
तेरे चरणों की धूलि में ही आन - बान गले मिले है
तेरे भोग में दाना - दाना अमृत बने
तेरी सोच से अपने सोच - विचार निखर उठे है ॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







