सड़कें, घर और लोग
विश्व स्तर की वार्ता हुई,
पर छोटे घर, गरीब बस्तियां छिपाए गए,
बाहरी मेहमानों के लिए सड़कें ठीक करायी गई,
बड़े बड़े भवनों को सजाया गया,
सब सही है साहिब,
मेहमान का स्वागत तो करना है,
पर आपकी जिम्मेदारी का क्या हुआ,
प्रेस वार्ता कितने सालों से ठप पड़ी है,
यमुना साफ़ कौन करेगा,
सफाई अभियान का कुछ अता पता नहीं,
मीडिया कब तक अपना काम नहीं करेगी,
आप से सवाल कौन करेगा,
लगातार विद्यालय बंद होना,
ये क्या विकास है,
पूर्वी राज्यों को उनके सम्मान के लिए,
कब तक लड़ना होगा,
प्रदूषण पर,
पर्यावरण पर,
गम्भीरता कब ली जायेगी,
कब तक देश धर्म और जात के नाम पर लड़ता रहेगा,
योग्य को हक के लिए कब तक झुकना होगा,
न्याय इतना मुश्किल क्यूँ हो रहा है,
घरों में रहने वालों की सुरक्षा नहीं,
घर गिर रहे हैं,
कोई जवाबदेही भी नहीं,
इतना नज़रंदाज,
देश के सर्वोच्च पद पर,
इतनी नाकामी,
आपको आत्ममोह हो गया है,
भोजन की सामग्री में मिलावट,
शिक्षा महँगी,
घर महँगे,
और हर सामान का दाम आसमान,
रुपया गिर रहा है,
या आम व्यक्ति की इज्जत,
बच्चे दब कर मर गए,
आपका कोई जवाब नहीं,
आपकी कोई कार्रवाई नहीं,
इस देश से बढ़कर हमारे लिए,
कोई जरूरी नहीं,
इंसानियत तो,
पहले ही कम साँसों पर थी,
आपके कार्यकाल में वो भी खत्म हो गई,
सड़कों पर लोगों को मौत का सत्यापन,
घरों में दबकर मरना,
और फिर समाज में,
कुरीतियां बढ़ते जाना,
कोई अच्छा संकेत नहीं,
साहब थोड़ा,
भारत में भी कदम रखे,
विदेशों से वापिस आ गए तो!!


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







