प्यार और इज़्ज़त
प्यार और इज़्ज़त दोनों एक साथ क्यों नहीं मिल पाता...?
क्या जिंदगी में अपने प्यार से शादी करना कोई गुनाह है...?
कोई समझ क्यों नहीं पाता कि कोई अपने प्यार के बगैर जिंदगी जीना भूल जाता है।
क्या जिंदगी में सिर्फ इज़्ज़त ही प्यारी है...?
ये समाज सिर्फ पैसों वालो के लिए है,
बाकी गरीब के लिए तो ये मौत से बत्तर है,
न जाने समाज वालों ने कैसी-कैसी प्रथा निकाली है, मारिया भात, षष्ठी कार्यक्रम, शादी ब्याह का खाना आदि...।
इन सबको खा के उनका पेट नहीं भरता तो इज़्ज़त पर आ जाते हैं, किसी को सब्जी अच्छी नहीं लगती तो किसी को घरवाले....।
काश मैं ऐसी - ऐसी प्रथाएं को जड़ से समाप्त कर पाती....।।
जिंदगी समाज के लिए नहीं,
अपने लिए जीना सीखो दोस्त...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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