मा हिरा और मोती है
खुद भूखी सोकर औलाद को खिलाती हैं
जिसके पास हे मा वह अमीर है
जो नहीं करता उनकी सेवा बो लोहै की जंजीर हैं
मां बाप है तो जी सकूंगा
यह नहीं है तो किसको मुंह दिखाऊंगा
आज मुझे जानते हैं मेरी मां बाप की वजह से वरना यह नहीं होते तो मेरी नहीं होती पहचान जिनके पास है मां बाप वही है असली भगवान।
इंसान का जन्म होता है
वह सब कुछ भगवान को मानता
भूल गए वह दिन मां ने तुम्हें रखा था 9 महीने पेट में जिस दिन भगवान नहीं थे उसे दिन सिर्फ मां की ममता थी जो तुम्हारे भीतर थी ।
माँ हे सब्जी बाप है रोटी
जिनके पास है सही सलामत वही हैं हिरा और मोती।
बालकवि हिमांशु दत्त 795
ईमेल कविता और अन्य जानकारी himanshudutt579@gmail.com
इंस्टग्राम आईडी Himanshu_dutt_795
Bal Kavi village chirdhani rajsthan
B.Kavi age 15 year


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