सच कहें तो हमसे और अश्क़ बहाए नहीं जाते
तुझसे दिल के हाल अब और छुपाए नहीं जाते
ये जो गुजरता वक़्त हैं ना, तुम आकर थाम लो
ऐसी हालत में हालात और आजमाए नहीं जाते
ये जो दर्द की कसक हैं न,ठहर जाए तो अच्छा
इस टूटे दिल से अब और दर्द कमाए नहीं जाते
वक़्त काफ़ी हुआ और मरम्मत भी ना हुई कभी
ढह चुके मक़ान से और तूफ़ान उठाए नहीं जाते
टूटे-फूटे दिल की दहलीज़ कबसे कुंवारी बैठी हैं
हमसे दिल के अरमाँ अब और दबाए नहीं जाते
तेरा होना इस जिंदगी में जरूरी लगता हैं जानाँ
तुझसे दूर होने के बहाने और बनाए नहीं जाते
कृष्णा दर्द बिखरा हैं ख़ामोश कंपकपाते होंठो पे
बिखरे दर्द के अहसास हमसे समझाए नहीं जाते
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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