होली सिर्फ़ रंगों का उत्सव नहीं,
यह मन के सूने आँगन में
उम्मीद की पहली कोंपल है।
जब सूखी डालियों पर
अचानक हरा विश्वास उग आता है,
जब बरसों से रूठे चेहरों पर
हँसी की धूप उतरती है—
तभी तो सच में होली होती है।
गुलाल का एक कण
सिर्फ़ रंग नहीं,
वह भेद मिटाने की एक कोशिश है।
वह कहता है—
ना कोई ऊँचा, ना कोई नीचा,
ना कोई अपना, ना कोई पराया,
सब एक ही धड़कन की आवाज़ हैं।
आओ इस बार
रंगों को दीवार न बनने दें,
उन्हें सेतु बनने दें—
जो दिल से दिल तक जाए।
आओ पिचकारी से
सिर्फ़ रंग न बरसाएँ,
मन की कड़वाहट भी धो डालें।
आओ हँसी में
थोड़ी सी करुणा मिलाएँ,
और उत्सव में
थोड़ा सा इंसान बचाएँ।
होली तब पूर्ण होगी
जब किसी के सूने आँगन में
हमारी उपस्थिति रंग बनकर उतर जाए,
जब किसी की आँखों का आँसू
हमारी मुस्कान से सूख जाए।
रंग उड़ें, पर रिश्ते न उड़ें,
मज़ाक हो, पर सम्मान न टूटे,
उत्सव हो, पर मानवता न छूटे।
यही होली का सच्चा अर्थ है—
रंगों से अधिक
रिश्तों को रंगना,
स्नेह और समरसता के साथ ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







