रात में सितारें, कुछ ज्यादा ही,चमक रहे थे,
शायद दिन में कोई सूरज, बिखर गया होगा।
गमगीन दिख रहीं थीं,गुलमोहर की डालियां,
फूलों का जखीरा,एक साथ झर गया होगा।
नदियों के ऊपर,धुओं का गुबार उड़ने लगा,
ज्वालामुखी खुद की आग से डर गया होगा।
जुल्म के दम पर ,राज खूब कर लिया था
सिंहासन हिला तो, राजा मर गया होगा।
सितम ने ही जीताया था,हरा भी दिया,सितम ने,
शायद कड़वी ममता से,जनमन भर गया होगा।
ये लोकतंत्र है, जनता सिंहासन बदल देती है,
मान लो कि तुम्हारा जादू,अब उतर गया होगा।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







