प्रकृति की प्रेरणा
हमने कभी सोचा न था कि
ज़मीन पर चलने वाले भी कभी
आसमाँ के सितारे बन सकते हैं,
और बिना पंखों के उड़ भी सकते हैं ।
कुछ के उत्साह ने शब्द दिए,
शब्दों ने ख़्वाब दिखाए,
उन ख्वाबों ने पंख लगाए
और पता ही नहीं चला
हम कब उड़ने लगे।
प्रकृति से प्रेरणा मिली,
जीवन ने अनुभव दिए,
सोच ने शब्दों को सँवारा,
और पता ही नहीं चला
प्रकृति की प्रेरणा
हमने कभी सोचा न था कि
ज़मीन पर चलने वाले भी कभी
आसमाँ के सितारे बन सकते हैं,
और बिना पंखों के उड़ भी सकते हैं ।
कुछ के उत्साह ने शब्द दिए,
शब्दों ने ख़्वाब दिखाए,
उन ख्वाबों ने पंख लगाए
और पता ही नहीं चला
हम कब उड़ने लगे।
प्रकृति से प्रेरणा मिली,
जीवन ने अनुभव दिए,
सोच ने शब्दों को सँवारा,
और पता ही नहीं चला
कब किसी ने
कलम बनकर
कामयाबी की किताब लिख दी ।
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







