के बीर जुए में हरे हो,
ये क्षत्रिय का धर्म नहीं के
ना बात करो तुम शर्म की
तुमने छोड़ा कोई कर्म नहीं
अधर्मी करे है संबोधन
वेश्या का कोई वर नहीं
डूब मारो तुम पांचों भाई।
पानी चूल्हू भर नहीं
ना लाज मेरी तुम बचा सके
अब ये तुम में सामर्थ नहीं
आता होगा केशव मेरा
ना समय करेगा व्यर्थ कही
हे माधव अब तो आजा तू
आकर लाज बचा जा तू
हो रहा अपमान मेरा
किया बाकी रहेगा मान तेरा
तुझ पर रुकी है आस मेरी
किया नहीं बचेगी लाज मेरी
जो लाज बचने न आया
किस काम का है फिर तेरा साया
प्रतीक्षा बाकी शेष नहीं है
अब तक तेरा संदेश नहीं है
यहां कौन बचाए जान मेरी
दुष्टों में त्रस्त बहन तेरी
साग से रोटी खाने वाले
संपूर्ण जगत रखाने वाले
नारी का सम्मान कहा है
मेरा टूटा अभिमान कहा है
वर्षों से बेरी घात लगाए
पापी मुझको हाथ लगाए
मेरे पांचों पति बेशर्म हुए
बिगड़े उनके कर्म हुए
दाव लगाए नारी का
पाप कमाए भारी सा
ना पांच पति मेरी लाज बचाए
वो बैठे पांचों शीश झुकाए
भीष्म से करूं मैं बात एक
फिर न बोल सके भीष्म तनेक
धृतराष्ट्र विधुर और द्रोणा भी
ना समझे कोई पीर पराई
हस्तिनापुर की भरी सभा में
एक नारी अबला बीर सताई
मेरे केश पकड़कर खींचे दुशासन
इतराता अपने मन में चूर
तेरी खेर नहीं है दुर्योधन
तू ना कर मुझको इतना मजबूर
इतराता हंसता दुर्योधन
मेरा चीर खींचता दुशासन
मेरे अग्नि दहके तन मन में
ये बीज बुआ है अन बन में
दासी दासी करता नीच्छ
किया दासी मुझे बनाएगा
मैं केश खोलकर वचन करूं
तू आगे आगे पछताएगा
ना बांधू अपनी केश लटाए
ना कोई भरू सब्र के घूंट
मेरे ज्वाला दहकी है मन में
आंखों में छलका रक्त खून
मुझे सब्र तभी तक न आए
दुर्शाशन मृत्यु ना हो जाए
ये दुशासन है घाती सा
मैं लहू पियूंगी छाती का
दुशासन तेरी छाती चीर
तेरे रक्त से लूंगी केश निखार
काल चक्र ये घूमेगा होगा फिर तेरा शिकार
इतनी सुनकर बात हरि ने
द्रोपदी का चीर बढ़ा दिया
न विलम्ब कराया माधव ने
पांचाली का मान रखा दिया
खींच खींच कर चीर हराए
दुशासन ना वीर बताए
सामने बैठा दुर्योधन
भागा छोड़ सिंहासन
कृष्णी ने हाथ जोड़कर
आशीर्वाद हरि का पाया है
विश्वास करो तो ईश्वर है
ये ईश्वर की सब माया है
द्रौपदी||महाभारत


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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