जीवन पानी में चमकते उस चाँद सा है,
जो देखने में बहुत करीब लगता है,
पर छूते ही अपनी दूरी बयाँ कर देता है।
जीवन भी पानी में दिखते प्रतिबिंब-सा एक छल है,
जहाँ हम सब चमकते हैं,
सुख-दुख से गुजरते हैं,
उम्र का हर सफ़र तय करते हैं।
पर मौत की दहलीज़ छूते ही,
यह सारा छल खत्म हो जाता है,
और हम कहीं दूर निकल जाते हैं।
चाँद दूर होकर भी नज़र आता है,
पर हम एक स्वप्न बनकर
बस यादों में रह जाते हैं ।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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