बिकता है जिस्म हर रोज़ उसका,
रौंदा जाता है दिल ऱोज उसका
होता है क्या हाल रोज उसका,
पूछता है कौन हाल रोज उसका
शहर में है चर्चा, रंगो रूप उसका,
नोचतें है गिद्ध जिस्म रोज़ उसका
शराबों में घोल कर पिया जाता है
महफ़िलों में जिस्म रोज़ उसका

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
बिकता है जिस्म हर रोज़ उसका,
रौंदा जाता है दिल ऱोज उसका
होता है क्या हाल रोज उसका,
पूछता है कौन हाल रोज उसका
शहर में है चर्चा, रंगो रूप उसका,
नोचतें है गिद्ध जिस्म रोज़ उसका
शराबों में घोल कर पिया जाता है
महफ़िलों में जिस्म रोज़ उसका
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम