देखती रह गई आँख ललचाई हुई।
जैसे बचपन की शोखी शर्माई हुई।।
राज-ए-दिल खुलने की हकीकत।
बेशर्मी भी रोक न पाई तन्हाई हुई।।
आइने में अदाएँ देखती तसव्वुर से।
अन्दर में 'उपदेश' खुशी आई हुई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
देखती रह गई आँख ललचाई हुई।
जैसे बचपन की शोखी शर्माई हुई।।
राज-ए-दिल खुलने की हकीकत।
बेशर्मी भी रोक न पाई तन्हाई हुई।।
आइने में अदाएँ देखती तसव्वुर से।
अन्दर में 'उपदेश' खुशी आई हुई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम