वो मिली तो लगा जैसे नेतरहाट मिल गया
दिल के सुने से घर को एक साथ मिल गया
उसकी आंखों में ठहरी थी जो शाम सी शांति
देखते ही मुझे अपना ही हाल मिल गया
उसकी बातों में पहाड़ों की ठंडी सी खुशबू
थके रास्तों को जैसे कोई रात मिल गया
वो जो हंसी तो रौशनी सी बिखरने लगी
सूखे लम्हों को जैसे बरसात मिल गया
पास बैठी तो खामोशियों भी गुनगुनाने लगी
दिल को चुपके से जीने का अंदाज मिल गया
मैं जो उलझा था शहर की भीड़ में कब से
उसके संग खुद से मिलने का एहसास मिल गया
उसके हाथों की नरमी में अजीब सी राहत थी
जैसे बरसों के दर्दों का इलाज मिल गया
मैने चाहा था रोक लूं ये पल अपनी मुट्ठी में
पर हवा था ये सपना जो दिन ढलते खो गया
अब वही यादें है और वही ठंडी सी खुशबू
वो गई तो लगा जैसे नेतरहाट खो गया


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







