ग़म के झरने सुखा कर कभी करीब आए।
फिर जाने क्या हुआ तुम कभी न मुस्कुराए।।
मैं तो खुश थी जैसे खुदा मिल गया मुझको।
सब हक दे दिये तुमको फिर भी न मुस्कुराए।।
सूरज को ढंकने वाले बादल भी छितरा गए।
खुले आसमान में मिले फिर भी न मुस्कुराए।।
वज़ह खोजते-खोजते प्यार की बाढ़ ले आए।
आँखों में आँखें डाल दी फिर भी न मुस्कुराए।।
आज फकत खुद से टकरा कर देखा 'उपदेश'।
आईना बनाया तुम्हें तुम गुमसुम नज़र आए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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