जिस लहर पर इतरा रहे उसका खौफ़ बाकी।
रोक न पाओगे उसे तुम्हारा भ्रम टूटना बाकी।।
ऐसे दौर में खामोशी टूटेगी आवाज के साथ।
आएगी बम के जैसी आवाज बारूद में बाकी।।
अपने अपने हथकंडे लगा कर गुरूर बढ़ गया।
नया दौर आ गया है नये दौर का जुनून बाकी।।
जो असहाय लगते उनका भी सत्य चिल्लायेगा।
उनकी ठोकर सम्हालना बेमिसाल सफर बाकी।।
अपनी पर इतराना इतना भी अच्छा नही होता।
जिन्हें भाव नही देते 'उपदेश' उनका शोर बाकी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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