नववर्ष के अवसर पर लिखी गई यह कविता पाठकों को बीते कल से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाने, रिश्तों को संजोने और मेहनत के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
नव वर्ष: एक नई शुरुआत
पुरानी डायरी का पन्ना,
आज फिर पलट जाएगा,
कलेंडर की दीवार पर,
एक नया साल आएगा।
जो बीत गया उसे भूलकर,
अब आगे बढ़ना है,
उम्मीदों के नए शिखर पर,
फिर से हमको चढ़ना है।
सूरज की पहली किरण,
नया पैगाम लाएगी,
आँखों में जो सपने हैं,
उन्हें सच कर दिखाएगी।
कड़वाहट को पीछे छोड़ो,
मीठी यादें बुनना है,
काँटों वाली राहों में भी,
फूलों को ही चुनना है।
रिश्तों में हो नई गर्माहट,
दिल में सबके प्यार हो,
खुशियों की हो ऐसी बारिश,
हर घर में त्यौहार हो।
कोई भी ना रहे उदास,
न कोई अब लाचार हो,
हर कदम पर सफलता हो,
और सुख का आधार हो।
अभिषेक! प्रभु से यही दुआ,
इस साल में मांगो तुम,
सत्य, प्रेम और सेवा की,
डगर पे ही चलो तुम।
खुशबू बनकर महको ऐसे,
जैसे खिलती कलियाँ हैं,
स्वागत करे 'छब्बीस' (2026) का,
गाँव और ये गलियाँ हैं।
लेखक: अभिषेक मिश्रा 'बलिया'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
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