कुछ बातें अधूरी रह गईं,
कुछ ख़्वाहिशें बिन कहे सो गईं,
वो पल, वो लोग, वो यादें सभी,
जैसे साँसों में ठहर सी गईं।
नज़रों में अब भी वो साया है,
जिसे वक्त ने हमसे छीन लिया,
हम हँसे भी तो अधूरी हंसी,
जैसे दिल ने सब कुछ पी लिया।
चाँद अब भी वही है, पर रोशनी कम है,
उसमें तेरी झलक अब धुँधली सी नम है,
तेरे बाद हर सुबह अधूरी लगती है,
हर शाम तेरे नाम की कमी कहती है।
अगर मिल जाए तू फिर कभी,
तो शायद कहानी पूरी हो जाए,
वरना यूँ ही तेरे इंतज़ार में,
ज़िंदगी एक दास्तान बन जाए।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







