हास्य -व्यंग्य
न करा अपनी फजीहत है
डॉ.एच सी विपिन कुमार जैन "विख्यात"
मेरे दोस्त ने कहा, ‘कुछ नया करके दिखा’,
मैंने सोचा, ‘चलो, इश्क़ का रास्ता अपना के दिखा’।
वो कहती थी, ‘मैं तेरी, और सिर्फ़ तेरी हूँ’,
मैंने सोचा, ‘वाह! दुनिया में मैं कितना लकी हूँ’।
मैंने कहा, ‘चलो, शादी का कार्ड छपाते हैं’,
वो बोली, ‘अरे, जल्दी क्या है, थोड़ा इंतज़ार कराते हैं’।
अगले दिन देखा, वो अपनी बिल्ली के साथ बैठी है,
और कार्ड में नाम उसका, किसी और के साथ लिखा है।
मैंने पूछा, ‘ये क्या है, ये तो ग़लत है’,
वो बोली, ‘क्या ग़लत है? बिल्ली को पनीर पसंद है’।
मैंने कहा, ‘पर मेरे नाम की जगह उसका क्यों नाम है?’
वो बोली, ‘अरे, वो तो बस मेरे भाई का है नाम!’
मैंने कहा, ‘चल छोड़, अब मैं अपनी इज़्ज़त बचा लूँगा’,
वो बोली, ‘नहीं, अब तो तेरी फजीहत करा दूँगा’।
मैंने पूछा, ‘कैसे?’ वो बोली, ‘सोशल मीडिया पे तेरी फ़ोटो लगा दूँगा’,
‘लिखूँगी ‘ये है वो, जिसने मेरी बिल्ली को धोखा दिया!’'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







