ग़ज़ल
मुकम्मल कभी जिंदगी हो जाये।
दूर जो सभी बेबसी हो जाये।
तलब कम होती नहीं मनसूबों कि
भले पास दौलत सभी हो जाये।
गरीबी से दूर दौलत कि चाहत ,
काश आदमी कि पूरी हो जाये ।
परेशां यहां जर्रा जर्रा बहुत,
कायनात पूरी सही हो जाय।
इस दौर में तुम कहो कहां 'प्यासा'
सभी चाहते जो वही हो जाये ।
-' प्यासा '


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







