दुश्मन मेरी शिकस्त पर मुँह खोलकर हँसा !
दोस्त जिस्म के अन्दर 'उपदेश' उछल पडा !!
जिन्दगी में रिश्ते-नातेदार भी किस काम के।
सब मरते गये कोई जला कोई कब्र में पडा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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दुश्मन मेरी शिकस्त पर मुँह खोलकर हँसा !
दोस्त जिस्म के अन्दर 'उपदेश' उछल पडा !!
जिन्दगी में रिश्ते-नातेदार भी किस काम के।
सब मरते गये कोई जला कोई कब्र में पडा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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