आज भी वैसे ही रोता है वो, मुझे याद करके
नम आंखों से ही सोता है वो, मुझे याद करके
गुमसुम गुमसुम बैठे, पानी की सतह पर,
उंगलियां फिरोता है वो, मुझे याद करके
फूल नहीं तोड़ता बाग में, गुलाब के पौधों से
खुद को कांटे चुभोता है वो ,मुझे याद करके
उसे अच्छे से जाना, समझा,पर प्यार नहीं की
पर खुद में मुझे समोता है वो, मुझे याद करके
कभी भी समझा नहीं, मेरी दिली जज़्बात़ों को
आखिर क्यूं?,क्यूं रोता है? वो, मुझे याद करके।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







