मुझे नही मालुम था अचानक सामने आई।
मोहब्बत दिल से मचलकर होठों पर आई।।
समझती खूब दिल की जुबाँ हद में रहकर।
मैं अन्दर से पिघला जब वो खिलखिलाई।।
मौका भी है दस्तूर भी उसे रंग लगाने का।
उसे भी आभास होगा इसलिए करीब आई।।
पहले मेरी हथेली उसके गाल तक पहुँची।
वो थोड़ा बहुत शर्माई हल्की सी कशमशाई।।
दिल से दिल मिलते कुछ देर मौन रहे हम।
गर्दन होले से चूमे कहा मुबारक होली आई।।
हकीकत जग जाहिर उसे अपना कहेंगे हम।
जज्बात उभर आए 'उपदेश' बूँदें छलकाई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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