✨ मेरी दोस्त ✨
चलने में उसका अलग ही रौब है,
हर क़दम में जैसे एक ख़ामोश-सा ख़्वाब है।
उसकी आँखों में जो नज़र मिला पाए ज़रा,
उसकी खामोश ताक़त से दिल तक काँप जाए जरा।
बड़ी-बड़ी आँखें, सच बोलती हैं चुपचाप,
कोई घूर कर देखे—इतनी मजाल नहीं किसी की बात।
बाहर से सब कहते हैं, बहुत मज़बूत है वो,
पर अंदर से जाने कितनी रातें रोती है वो।
सब पर भरोसा करती है, दिल खोलकर हर बार,
और हर बार वही लोग तोड़ देते हैं उसका ऐतबार।
न जताती है दर्द किसी को, न कुछ कहती है,
अपने ही सन्नाटों में चुपचाप सब सहती है।
दिल में ढेरों दुख हैं, पर चेहरा मुस्कान लिए,
किसी पर अब पूरा भरोसा नहीं—ये ज़ख़्म पुराने दिए।
पर जो कोई बन जाए उसके लिए खास,
उसके लिए तो वो सब कुछ कर जाए बेपरवाह।
चेहरे की सुंदरता पर सब हो जाएँ फ़िदा,
पर कोई ऐसा आए—जो उसके अंदर की सुंदर आत्मा देख कर ही घुटनों पर आए।
बहुत अच्छी है मेरी दोस्त, थोड़ी-सी नादान,
मज़बूती की चादर में छुपा है नर्म-सा इंसान।
— Gitanjali Gavel ✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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