1.जितनी बार पानी पीते हैं
उतनी बार पानी पी नहीं सकते
क्योंकि पीयूष से ज्यादा स्वाद पानी में है
धरा से जो जन्म लेता है वही स्वाद और पवित्र
होते है ॥
2. कभी-कभी आंखों में आंसू भी रेगिस्तान हो जाती है
तभी सिर्फ आंखें नहीं बल्कि आँसू भी सो जाते है ॥
3.कोई खबर नहीं मिली तुझसे
पर ताउम्र पर सबर है मुझमें ॥
4.लफ्जों में फूल कहां है ?
फिर भी रिझाते है
लफ्ज़ों में कांटे कहां है ?
फिर भी चुभ जाते हैं ॥
5.पुरानी किताब में
एक उपहार मिला है
आंसुओं को उतारने
एक कलम मिली है ॥
6. न रोने का वादा किया मैंने
पर न जाने मन कब पत्थर बन गए ॥
7.फूल महकते हैं माटी से
बातें महकती है अपनी बानी से ॥
8.जब मैं तुम्हें देखती
मैं बहुत सुंदर दिखती
क्योंकि तुम मेरी आइना हो ॥
9.सिर्फ इंतजार नहीं किया मैंने
इंतजार में टूटे सपनों को बिखरने नहीं दिया ॥
10.भोजन हो या प्रेम हो
कुछ अधिक होने से रुचि नहीं लगती ॥
11.दिल - ए - हाल बातों में कैसा बयां करें
इंसान की बातें इंसान को कहां समझ में आए ॥
12.मै सदैव एक जेवर पहनती हूं
वो मेरे होठों पे मुस्कान ही है ॥
13.न फूल, न मिले पौधा के मान
न आवश्यकता, न मिले इंसान का मान ॥
14.आंखों से निमंत्रण भेजा है मैंने
तेरे दिल को
पर जवाब तो तेरे आंसू ने दिया है ॥
15.कभी सोचा कि नहीं मैं
फूलों की पंखुड़ियां भी चुभ जाते है
जो तेरी आंखों में पहली बार देखा है ॥
वडिगि. अरुणा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







