हम उनकी महफ़िल में थे, अनचाहे मेहमाँ की तरहा..
चेहरे पे इत्मीनान था, दिल मैं लहू था तुफां कि तरहा..।
वो फरियाद सुनेंगे, जाने किस तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ पर मेरी..
हमारी भी जुबां लड़खड़ाई थी, उनकी जुबां की तरहा..।
इस सफ़र का भी जाने, कोई अंज़ाम होगा कि नहीं..
इक मंज़र नजर आता है, मंज़िल-ए-गुमाँ की तरहा..।
बागबां के इरादे न थे, फरियाद-ए-बुलबुल भी न थी..
तभी तो ये बहारें भी गुज़र जाएंगी, ख़िज़ाँ की तरहा..।
हम पर अब इतना भरोसा भी, कुछ ठीक नहीं सनम..
खड़े हैं किसी शौंक से, मगर हैं गिरते मकां की तरहा..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







