उनसे ही अस्तित्व मेरा,
उनसे ही होता शाम सवेरा।
रखे कदम जहाॅं,लहलहा जाये वो ज़मीं,
मेरे रोम-रोम में बस उन्हीं का बसेरा।
ना कभी वो करते मेरा तेरा,
कहते जो भी है 'जाना' है हमारा।
कहो ना ये कि हूॅं मैं किसी और का,
'जाना' मैं तो हूॅं सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा।
उनसे ही मैं रहती हूँ महकी हुई,
उनसे ही मेरी रतिया है चमकी हुई।
दीए जल उठते हैं हर तरफ़ महसूस कर उन्हें,
उन्हीं से है मेरी ज़िंदगी खिली हुई।
वो है इतने सदाचारी,
कि पड़ जाए आगे उनके
फीका हर अहंकारी।
साक्षात् कृष्णा विराजे हैं उनमें,
मैं तो जाऊं उन पर बलि बलिहारी।
🌹🥰 रीना कुमारी प्रजापत 🥰🌹
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







