मौसम में अनायास ही बहार आ गयी,
दिल में उमंग संग में करार आ गयी,
भर गयी शरारतें और मस्तियां कई,
वो लेके अपनी प्यार का इजहार आ गयी।।
गुलशन भी खिल गयी है और भरी है सोखियां
फूलों में रंग, खुशबू बेशुमार आ गयी।
गरज गरज जो पत्थरों से गिरते रहे,
झरनों में मीठी गीतों की फूहार आ गयी।
चांद आया छत पे और सितारे जमीं पर,
पांवों में लेके प्यार की झनकार आ गयी।।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







