मैं मर जाऊँ तो मुझको ऐ यारा जला देना
मेरा हर हर्फ़ हर नाम-ओ-निशां मिटा देना
मैंने अपनी हर ख्वाहिश का कत्ल किया हैं
हो सके तो मुझ पर लाल क़फ़न चढ़ा देना
कभी अपने कभी गैर कभी ख़ुद ही तड़पे
हों सके तों मेरी पीड़ा क़ो गंगा में बहा देना
क्या ही मातम मनाना क्या रोना-धोना यारो
मुक्ति मिली हैं पीड़ा सें,दिल क़ो समझा देना
शायद क़र्ज़ चुक जाए इस जन्म में ही मेरा
हों सके तों राम मेरी रूह क़ो सुकूँ दिला देना
"कृष्णा" क़ो ये औरत ज़ात बड़ी भारी जीना
हों सके तों अगले जन्म में तितली बना देना...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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