उम्र का पहला
और आख़िरी प्यार—माँ ही होती है
जो हर एहसास में नहीं दिखती,
पर हर दिल की धड़कन में होती है।
एक अनजान
पर निःस्वार्थ रिश्ता,
जिसके साथ होने भर से
हर डर दूर हो जाता है।
जिसकी उँगली पकड़कर
हर राह आसान लगती है,
जिसकी ममता की छाँव
हर थकान मिटा देती है।
जिसकी डाँट भी
दुआ बन जाती है।
जिसके भरोसे की डोर थाम
हम अपने सपनों की उड़ान भरते हैं।
दुनिया के सारे रंग
एक दिन फीके पड़ जाते हैं,
पर माँ के प्रेम का रंग
न कभी बदलता है,
न ही कभी फीका पड़ता है।
बाक़ी सब रिश्ते तो
महज़ एक छलावा हैं,
जो सच्चे रंग की चादर ओढ़े
समय की बारिश में धुल जाते हैं,
एक माँ का प्रेम ही है
जो हर मौसम में एक-सा रहता है।
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







