जो रूठे हैं मुझसे, बिना मनाए ही लौट आयेंगे,
जो गए दिल को छलनी कर, माफ़ी मुझसे मांगेंगे।
मेरा नहीं रहा रत्ती भर भी दोष कहीं,
सोचेंगे जब बातों को, तो दोषी खुद ही को पाएंगे।
पहले सी ही मोहब्बत वो मुझसे फिर करने लगेंगे,
बिना ग़लती मुझे सज़ा दी इस पर पश्चाताप करेंगे।
कुछ गलतफहमीयों ने जगह बना ली दिल में उनके,
एक दिन वो खुद आकर इस गलतफहमी को मिटाएंगे।
पनपे जो विचार उनके मन में वो लौट चले जाएंगे,
फिर से दोस्त बन वो एक नई महफ़िल सजाएंगे।
आग़ोश मे लेंगे मुझे, वो अश्रुधारा बहाते हुए,
और फिर से पहले सी ही प्यारी मुस्कान मुझे देंगे।
🖋️ रीना कुमारी प्रजापत 🖋️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







