लिखी टिप्पणी में पढ़ा जो लिखा ही नही तुमने।
मेरे मन में उमड़ी भावना समझ ली जैसे तुमने।।
सूखी पत्तियों की भाषा समझ लेती हवा जैसे।
चरम तक पहुँचा दिया सद-भाव को जैसे तुमने।।
मौन भी जब सीधा भीतर तक उतरने लगा मेरे।
कभी यों भी लगता है जज्बात छू लिये हो तुमने।।
रिश्ते शोर से नही मगर ठहराव से गहरे होते गए।
शब्द की महत्ता होगी महसूस ज्यादा किया तुमने।।
मौन की परिभाषा बिना बोले ही सब समझ लेना।
इशारों की अहमियत पर 'उपदेश' बल दिया तुमने।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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