चूड़ी, कंगन, बिछिया, पायल—
इन सबकी आखिर कीमत क्या है?
अगर स्वाभिमान गिरवी रखना पड़े—
तो ये सौभाग्य है या सज़ा है?
माथे का सिंदूर चमकता रहे—
पर आँखों में अपमान भरा हो,
हाथों में कंगन खनकते रहें—
पर दिल भीतर से मरा हो।
तो बताओ—
ये श्रृंगार है या व्यापार है?
जहाँ औरत खुद नहीं बचती—
बस उसका दिखावा तैयार है।
चूड़ियों की खनक अगर
मेरी चुप्पी का सौदा बन जाए,
पायल की हर झंकार अगर
मेरी आज़ादी को खा जाए—
तो ऐसी खनक, ऐसी झंकार
किस काम की होती है?
जहाँ हर आहट के पीछे
एक औरत रोती है।
बिछिया अगर रिश्ते की नहीं,
बंधन की बेड़ी बन जाए,
और सिंदूर अगर प्रेम नहीं—
बस सहने की लकीर बन जाए—
तो सुन लो—
मैं ऐसे हर प्रतीक को ठुकरा दूँगी,
जो मुझे मुझसे ही जुदा करा दे,
मैं उस हर सौभाग्य को मिटा दूँगी
जो मेरी आत्मा को सजा बना दे।
तुम कहते हो—
“ये सब तुम्हारी शान हैं…”
मैं कहती हूँ—
“अगर अपमान मिले—तो ये सिर्फ़ निशान हैं…”
निशान उस सोच के,
जो औरत को सजाकर चुप कराती है,
जो उसकी खामोशी को
उसकी मर्यादा बताती है।
पर अब नहीं—
अब मैं ये सौदा नहीं करूँगी,
स्वाभिमान के बदले
कोई श्रृंगार नहीं धरूँगी।
अभाव में जीना मंज़ूर है मुझे,
पर अपमान में सजना नहीं,
मैं नंगी सच्चाई बनकर रह लूँगी—
पर झूठे गहनों में ढलना नहीं।
क्योंकि—
चूड़ी की कीमत तब है
जब हाथ सम्मान से उठें,
पायल की कीमत तब है
जब कदम इज़्ज़त से बढ़ें।
और सिंदूर की कीमत तब है—
जब आत्मा मुस्कुराए,
ना कि हर दिन
थोड़ा-थोड़ा मरती जाए।
तो याद रखना—
श्रृंगार तब तक ही सुंदर है,
जब तक स्वाभिमान ज़िंदा है,
वरना हर चमकता गहना
बस एक टूटा हुआ धंधा है।
मैंने चुन लिया है—
खुद को, अपने सत्य को,
अपने स्वाभिमान को,
बाकी सब—
चाहे चूड़ी हो, कंगन हो या सिंदूर—
अगर वो मुझे तोड़े,
तो उसका ना होना ही
मेरा सबसे बड़ा सौभाग्य है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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