रिहाई की उम्मीद में
तुम से बात करने की उम्मीद में बैठा हूं मैं
कौन कहता है तुम से, अब भी रूठा हूं मैं
न जाने वो वक्त था कौन सा मालूम नहीं
जिस के कारण अब भी अकेला बैठा हूं मैं
याद आती हैं मुझे तुम्हारी, वो प्यारी बातें
अपनी बातों की वजह से ही दूर बैठा हूं मैं
गर न कहता मैं उस वक्त वो बातें तुमसे
सभी को लगता है यही तुम से रूठा हूं मैं
अब तो अच्छा है यही कि दूर रहूं तुम से
यही सोचकर आजकल दूर ही रहता हूं मैं
अकेलापन ही अब मुनासिब, सजा है मेरी
अब इस अकेलेपन की कैद में, बैठा हूं मैं
तुम्हारे ईमेल से ही रिहाई मिलेगी इस से
इसी रिहाई की उम्मीद में अब बैठा हूं मैं
गर न आया ईमेल तो मैं भी ये समझुंगा
जारी रहेगी ये सजा ये सोच के बैठा हूं मैं
कभी न कभी तो ये रिहाई, मिलेगी यादव
इसी उम्मीद में अकेलेपन में यूं बैठा हूं मैं
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







