कुदरत का अदृश्य तराजू
शिवानी जैन एडवोकेट Byss
इंसान के कानून में तो, रिश्वत भी चल जाती है,
पर कुदरत के दफ्तर में, बस सच्चाई ही पलती है।
वहाँ न वकील की दलील है, न कोई सिफारिश है,
वहाँ तो बस कर्मों की, होती एक बारिश है।
तुम जो आज किसी का, हक छीन कर बैठे हो,
अन्याय की बुनियाद पर, महल बीन कर बैठे हो।
मत समझो कि ऊपर वाला, सो रहा है चैन से,
वो देख रहा है हर मंजर, अपनी दिव्य नैन से।
समय का चक्का घूमता है, बड़ी खामोश रफ़्तार से,
किए का फल मिलता है, इसी जग के बाज़ार से।
जो बोया है तूने आज, वही कल तुझे काटना होगा,
अन्याय की उस फसल को, अकेले ही छांटना होगा।
कुदरत का न्याय कभी, चेहरे को नहीं देखता,
वो तो बस नीयत की, गहराई को है लेखता।
अंधेर नहीं है उसके यहाँ, बस वक्त का फेरा है,
हर गुनहगार की रात का, एक भयावह सवेरा है।
न्याय की उस लाठी में, आवाज़ नहीं होती,
पर जब वो पड़ती है, तो कोई छत नहीं होती।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







