कुछ तो खास होगा उनमें,
जो स्वागत में,
पलाश के फूल बिखर जाते हैं राहों में,
पत्ते चनारों के भी उड़ कर लिपट जाते हैं सीने से।
हवाएं महक उठती है,
सुरमई अंदाज़ में लहराने लगती है,
कुछ तो खास होगा उनमें,
जो इस ज़मीं पे उतरते ही,
यहां की फसल लहलहा उठती है।
कुछ तो खास होगा उनमें,
जो स्वागत में,
तितलियां मंडराने लगती है आसपास में,
मोर भी नाचने लगते है उनके सामने।
सरसों के फूल मुस्कुराने लगते हैं,
सूरजमुखी के फूल शर्माने लगते हैं,
कुछ तो खास होगा उनमें,
जो इन पर नज़र पड़ते ही
ये उन्हें आगोश में लेने को मरते हैं।
कुछ तो खास होगा उनमें,
जो स्वागत में,
कोयल कुहू-कुहू कर चलती है साथ में,
चिड़ियां भी लगती है प्रेमगीत गुनगुनाने।
केसर की क्यारी चहक उठती है,
बरखा फूलों की होने लगती है।
कुछ तो खास होगा उनमें
जो दाख़िल होते ही इस उपवन में,
कली-कली खिल उठती है।
💐** रीना कुमारी प्रजापत**💐
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







